चुनावी बही · पांच दर्ज पड़ाव
1985: बचत से पहली विधायकी तक
किसी पड़ाव को चुनकर आर्थिक सहारे, चुनावी दांव और जीत के बाद की रात का क्रम पढ़ें।
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1985
₹20,000
सहारा
मंजू ने ढाई साल की बचत दी
चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं थे। नीतीश के दोस्त मीता के मुताबिक मंजू ने अपनी ढाई साल की बचत उन्हें सौंप दी।
रिपोर्ट का संदर्भ
मीता ने किताब ‘नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर से’ में इसे डूबते के लिए तिनके का सहारा बताया।