रिपोर्टर: ‘दुबई से चलने वाली बेटिंग साइट के लिए अकाउंट चाहिए’
रोहतास: ‘इनमें से ज्यादातर पर साइबर क्राइम का नोटिस आ जाता है’
रिपोर्टर: ‘मुकुल के पास झारखंड के 70-80 लड़के हैं, उन्हीं के नाम पर अकाउंट खुलना है’
रोहतास: ‘हां, खोल देंगे। अपने एक-दो साथियों से भी खुलवा देंगे’
रिपोर्टर: ‘बेटिंग का पैसा आएगा, अगर कोई शिकायत आई तो कैसे पता चलेगा’
अश्वनी: ‘जैसे AML आएगा, आपको बता देंगे…’
रिपोर्टर: ‘मुझे 50-60 अकाउंट चाहिए, लेकिन सारे लड़के झारखंड और बिहार के हैं’
अश्वनी: ‘कोई दिक्कत नहीं’
रिपोर्टर: ‘मतलब आप एक फर्जी अकाउंट के 25 हजार लेते हो’
अश्वनी: ‘हां, और वो भी कैश चाहिए’
रिपोर्टर: ‘सट्टे का पैसा है, साइबर क्राइम से कोई अलर्ट आया, तो कैसे पता चलेगा?’
प्रमोद: ‘मेल आने पर पता चल ही जाता है’
रिपोर्टर: ‘…मुकुल के पास बंगाल के 70-80 लड़के हैं, वो आपको सारे डॉक्यूमेंट्स दे देंगे’
प्रमोद: ‘सेविंग अकाउंट तो खोल ही सकते है, उसमें क्या दिक्कत है’
रिपोर्टर: ‘फिर तो ये फर्जी अकाउंट हुआ, फर्जी पते पर बना और न बंदा दोबारा मिलेगा’
प्रमोद: ‘…फिर बंदा भी बरी है और खोलने वाला भी बरी है’
रिपोर्टर: ‘एड्रेस तो रहेगा, लेकिन बंदा दोबारा नहीं मिलेगा’
प्रमोद: ‘अकाउंट खोलते वक्त बंदा उस एड्रेस पर रहता था, बस इतना काफी है’
रिपोर्टर: ‘अब आप ये बताओ कि ऐसे अकाउंट कितने दिन चल सकते हैं’
रब्बानी: ‘गेमिंग में तो 2-3 दिन ही चलेगा’
रिपोर्टर: ‘…वो एक बार अकाउंट खुलवाने के बाद दोबारा कभी नहीं मिलेंगे’
रब्बानी: ‘अपने पास उनका एक फोटो रख लेना क्योंकि जरूरत पड़ सकती है’