पैदावार: 10 साल बाद गिरावट
2007-08 से 2026-27 तक हर साल चावल की पैदावार बढ़ी या घटी: 20 साल में 5 बार गिरावट, 2016-17 से लगातार 10 साल बढ़त और 2026-27 का अनुमान 15.40 से 14.40 करोड़ टन, यानी 6.5% कम।
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भारत में इस बार पिछले साल से करीब 1 करोड़ टन कम चावल होने का अनुमान है। चार विजेट: 20 साल में पैदावार की 5 गिरावटें और टूटा 10 साल का सिलसिला, 45% चावल वाले 7 राज्यों में 40% तक कम बारिश, सोना मसूरी और स्वर्ण के बढ़े दाम से महीने का खर्च, और लक्ष्य से 6 गुना सरकारी भंडार के बावजूद चिंता की तीन वजहें।
लेखक: दैनिक भास्कर
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2007-08 से 2026-27 तक हर साल चावल की पैदावार बढ़ी या घटी: 20 साल में 5 बार गिरावट, 2016-17 से लगातार 10 साल बढ़त और 2026-27 का अनुमान 15.40 से 14.40 करोड़ टन, यानी 6.5% कम।
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जून-सितंबर में पूरे देश में सामान्य से 12% कम बारिश, जबकि पंजाब, हरियाणा, बिहार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरलम में 40% तक कम। नक्शे पर देखिए: इन्हीं 7 राज्यों में देश का 45% चावल होता है।
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सोना मसूरी 25% बढ़कर ₹58 और स्वर्ण 10% बढ़कर ₹35 प्रति किलो तक। हर महीने कितना चावल लेते हैं, चुनिए: 10 किलो पर सोना मसूरी में ₹116 और स्वर्ण में करीब ₹32 ज्यादा। पिछले साल का दाम बताई गई बढ़त से निकाला गया है।
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1 सितंबर को सरकारी भंडार 5.96 करोड़ टन, 1 अक्टूबर के 1.03 करोड़ टन लक्ष्य का करीब 6 गुना। तीन वजहें चुनिए: करीब 3.5 करोड़ टन कच्चा धान, 2025-26 में एथेनॉल के लिए 72 लाख टन और PDS-मुफ्त अनाज के लिए अलग हिस्सा।
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