एजेंट से शुरू हुई कड़ी 3 बैंकों के स्टाफ तक पहुंची
स्टिंग की पांचों कड़ियां एक साथ देखिए — किसने किससे मिलवाया, कौन किस बैंक और ब्रांच में है, और हर एक ने क्या दावा किया।
साइबर ठगी की रकम कहां जाती है, ये तलाशते हुए दैनिक भास्कर म्यूल अकाउंट खुलवाने वाले एजेंट तक पहुंचा। उसने दिल्ली के 3 प्राइवेट बैंकों के स्टाफ और अफसरों से मिलवाया, जिन्होंने 30-35 बैंकों में दूसरों के नाम पर खाते खुलवाने और रकम न फंसने देने का भरोसा दिलाया। इन 12 इंटरैक्टिव में नेटवर्क की पांच कड़ियां, एक अकाउंट के चार रेट, अकाउंट की उम्र पर तीन अलग दावे, 35 बैंकों की पहुंच, होल्ड से पहले अलर्ट की खबर, बैंक का फ्रीज खुलवाने का दावा, 1 करोड़ लिमिट का दाम, पते की जांच का दावा, ठगी की रकम का रास्ता, स्टाफ से खुलकर हुई बातें, कागज पर गढ़ा कारोबारी और बैंकों को भेजे सवाल देखिए। यस बैंक, इंडसइंड बैंक और सिटी यूनियन बैंक को भेजे सवालों का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
लेखक: उमेश पाटिल
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स्टिंग की पांचों कड़ियां एक साथ देखिए — किसने किससे मिलवाया, कौन किस बैंक और ब्रांच में है, और हर एक ने क्या दावा किया।
एक ही म्यूल अकाउंट के चार रेट एक पैमाने पर रखिए और किसी रेट पर टैप करके वो दावा पढ़िए जिसमें वो बताया गया था।
दिन सरकाकर देखिए कि एक ही रैकेट में इंडसइंड, सिटी यूनियन और यस बैंक के स्टाफ के दावे कब-कब बीत जाते हैं।
हर बैंक में 5 या 10 अकाउंट का दावा चुनिए और देखिए एक डिप्टी मैनेजर की बात से कितने अकाउंट का हिसाब बनता है।
यस बैंक के डिप्टी मैनेजर अश्वनी का दावा चार कदमों में: AML अलर्ट पहले स्टाफ के पास, फिर खाता चलाने वाले को खबर, सारा पैसा बाहर और होल्ड खाली खाते पर। अलर्ट भेजकर क्रम देखिए।
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इंडसइंड बैंक के स्टाफ रब्बानी के मुताबिक बैंक का फ्रीज कस्टमर के साथ फोटो और वेरिफिकेशन से खुल जाएगा, साइबर के फ्रीज पर 'हमारी कोई गलती नहीं'। दोनों हालात में ताला देखिए।
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फोन पर मिला 1 करोड़ लिमिट वाला कॉर्पोरेट अकाउंट 1.25 लाख में, ऊपर से अश्वनी के 25 हजार। पैमाना बदलकर देखिए कि 1.5 लाख का दाम लिमिट का सिर्फ 1.5% है।
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सिटी यूनियन बैंक के स्टाफ प्रमोद के मुताबिक पता खाता खुलते वक्त सही होना और चेक बुक वहां मिलना काफी है। बंदा चला जाए और अलर्ट का मेल आए, तब भी बैंक का रिकॉर्ड नहीं बदलता।
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भास्कर के ग्राफिक के तीन कदम एक दृश्य में: लालच देकर किसी और के नाम का खाता, ठगी की रकम सबसे पहले उसी म्यूल अकाउंट में, फिर कई खातों में घुमाकर असली अपराधी तक का रास्ता धुंधला। साथ में I4C के आंकड़े।
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चार बैंक स्टाफ से बातचीत में सट्टे का पैसा, बाहर के लड़के, फर्जी खाता और गायब होने वाला बंदा, किससे क्या खुलकर कहा गया। किसी खाने पर टैप करके रिपोर्टर की बात और स्टाफ का जवाब पढ़िए।
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सिटी यूनियन बैंक के प्रमोद के बताए कागज: दिल्ली के पते का रेंट एग्रीमेंट, बिना टैक्स वाली ITR और सदर बाजार वाला रीटेल बिजनेस। परत बदलकर देखिए कि रिपोर्टर ने उन्हें क्या बताया था।
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भास्कर ने 30 जुलाई की शाम तीनों बैंकों को ईमेल कर उनका पक्ष पूछा और आंतरिक जांच के बारे में सवाल किया। खबर लिखे जाने तक किसी बैंक का जवाब नहीं आया।
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